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शनिवार, 17 मई 2014

परिवर्तन की शीतल बयार नितिन गडकरी का स्वागत है



आखिरकार जैसा कि पहले से ही अनुमान था, श्री नितिन गडकरी नागपुर से चुनाव जीत गये। सिर्फ जीते ही नहीं वरन अच्छे खासे २.८४ लाख वोटों से जीते। धर्म जाति के आधार पर चुनावों का विश्लेषण करने के आदी लोगों की अकल अब तो कुछ अलग सोचने को मजबूर होगी। मैं पहले ही कहा था नागपुर में दो ही विकल्प है, या तो गडकरी जीतेंगे या फिर भारी बहुमतों से जीतेंगे।

http://anjeevpandey.blogspot.in/2014/03/blog-post.html

१४ मार्च को ही मुझे गडकरी की जीत का अनुमान हो गया था। इस दिन अरविंद केजरीवाल की नागपुर के कस्तूरचंद मैदान पर आम सभा हुई थी। इस सभा को मैंने जनता के स्वस्फूर्त प्रतिसाद के लिए ऐतिहासिक करार दिया था। मगर इसी के साथ यह संभावना जता दी थी कि केजरीवाल की यह सभा कहीं गडकरी की ऐतिहासिक जीत का प्रतीक तो नहीं है।

http://anjeevpandey.blogspot.in/2014/03/blog-post_14.html

गडकरी की जीत इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि देशभर में नागपुर लोकसभा का ही हाईप्रोफाइल चुनाव ऐसा रहा जहां व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप नहीं हुए। आम आदमी पार्टी की अंजलि दमानिया ने जरूर कुछ आरोप लगाने का प्रयास किया लेकिन कांग्रेस के श्री विलास मुत्तेमवार और भाजपा के श्री नितिन गडकरी दोनों ही प्रत्याशियों ने संयमित भाषा के प्रयोग के साथ ही चुनाव प्रचार को अंजाम दिया। टिकट वितरण के पहले ही मुझे इस बात का अनुमान था कि इस चुनाव में कांग्रेस के श्री मुत्तेमवार को ज्यादा वोट मिलें या न मिलें, मगर वो अपना पुराना वोट बैंक कायम रखेंगे। उन्हें मिले ३ लाख वोट इसे साबित करते हैं। मुत्तेमवार जी ने कांग्रेस का वोट बैंक बचाये रखा। ये बात अलग है कि मतदाताओं की संख्या बढ़ने के साथ ही और गडकरी के कार्यों ने उन्हें ५.५ लाख से ज्यादा वोट दिला दिये। बसपा ने भी अपना १.२५ लाख वोटों का बैंक बचाए रखा। आम आदमी पार्टी की अंजलि दमानिया ने जरूर ७० हजार वोट लेकर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। वै मैंने आम आदमी पार्टी को ८० वोट मिलने का अनुमान व्यक्त किया था।
गडकरी की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदान के अंतिम दिनों में यह फैलाया गया कि फलानी जाति के इतने वोट हैं, फलाने धर्म के इतने वोट हैं। मगर जो संयमित आचरण श्री गडकरी और श्री मुत्तेमवार ने व्यक्त किया, वही आचरण जनता ने भी व्यक्त किया। धर्म और जाति के नाम पर वोट नहीं पड़े।

http://anjeevpandey.blogspot.in/2014/04/blog-post_8.html


आपको बता दें कि गडकरी सिर्फ लोकसभा जीत के प्रत्याशी ही नहीं हैं, कई और भी मायने हैं गडकरी के। इस संबंध में मेरे पुराने ब्लाग पोस्ट

विजनरी परफार्मर नितिन गडकरी


http://anjeevpandey.blogspot.in/2014/04/1.html

और

गडकरी हैं परिवर्तन की सुहानी बयार

http://anjeevpandey.blogspot.in/2014/04/blog-post.html

जरूर पढ़ें। और भविष्य के नेता को समझें। गडकरी जी को हार्दिक शुभकामनाएँ। बधाई।


बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए को बहुमत के रुझान पर व्यापारी प्रसन्न

देश भर के व्यापारियों के शीर्ष संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को तेजी सेमिल रहे बहुमत को देश के लिए एक सकारात्मक परिवर्तन बताते हुए देश की अर्थव्यवस्था और भविष्य के लिए एक नए अध्यायकी शुरुआत बताया है !

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी.भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खण्डेलवाल ने एन डी ए की विजय पर बेहद ख़ुशी जाहिरकरते हुए कहा की इस जीत में देश भर के व्यापारियों का भी बड़ा योगदान है जो इस बात से साफ़ जाहिर होता है की आसाम,पश्चिम बंगाल, अंधत्र प्रदेश, ओडिशा जैसे राज्यों में भी बीजेपी और एन डी ए को जहाँ सीटें भी मिली हैं वहीँ वोटों का शेयर भी बहुतबड़ा है ! देश के व्यापारियिों ने इस चुनाव में खुल कर भाजपा और एन डी ए का साथ दिया है !

श्री भरतिया एवं श्री खण्डेलवाल ने आशा व्यक्त की है की श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार  रिटेल ट्रेड को अपनी प्राथमिकतामें रखेगी और बहुप्रतीक्षित सुधारों को गति देगी !



रविवार, 6 अप्रैल 2014

विजनरी परफार्मर नितिन गडकरी - 1





राजनीति की दहकती भट्टी मे शीतल मंद बयार

नागपुर से लोकसभा के प्रत्याशी और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन गडकरी को विकास पुरुष के नाम से जाना जाता है. इसका कारण है कि उन्होंने विकास को लोकतांत्रिक बनाया है. विकास को आम जनता तक पहुंचाया है.
विकास पुरुष की उनकी इमेज में उनका विजनरी परफार्मर होना काफी सहायक रहा है. गडकरी विजनरी परफार्मर हैं. मैंने फेसबुक के एक कमेंट में लिखा था कि आम आदमी पार्टी के लोग एक्टिविस्ट हैं. यानी ये लोग बुराई के खिलाफ आवाज उठाते हैं. जबकि नितिन गडकरी विजनरी परफार्मर हैं. विजनरी इसलिए क्योंकि इनके पास विजन है (यही कारण है इन्हें भाजपा की राष्ट्रीय विजन समिति का अध्यक्ष बनाया गया है). विजन है, सोच है और सिर्फ सोच ही नहीं है बल्कि इस सोच को कार्यरूप में परिणित करने का माद्दा भी है.

समस्या का समाधान खोजते हैं

नितिन गडकरी कभी समस्या पर अधिक चर्चा नहीं करते. जब उन्हें कोई अपनी समस्या बताता है तो उनका ध्यान तुरंत समस्या के समाधान की ओर चला जाता है. जैसे किसी को हार्ट के ऑपरेशन के लिए पैसे चाहिए. गडकरी तुरंत किसी डॉक्टर को फोन कर देंगे और सामने वाली की समस्या का हल हो जाएगा. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के निकट रहते और इसे स्वीकार करते हुए गडकरी ने नागपुर शहर में जाति-धर्म की दीवार तोड़ी. हजारों मुसलमानों, गरीबों के हार्ट का ऑपरेशन, आंखों का ऑपरेशन अलग-अलग योजनाएँ बना कर कराया.

दूर की सोच और उसका क्रियान्वयन

पूर्ति उद्योग समूह, जिस कारण गडकरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, सोच को कार्यरूप में परिणित करने का सबसे बड़ा उदाहरण है. गडकरी खामोशी से कई बड़ी क्रांतियों के जनक रहे हैं. जब वे महाराष्ट्र के पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर थे, उस समय सिविल इंजीनियरों की बेरोजगारी को दूर करने के लिए हजारों युवाओं को ठेकेदार बना दिया. सिर्फ मार्गदर्शन ही नहीं किया बल्कि उन्हें काम भी दिलाया और काम करने के लिए धन दिलाने में भी मदद की. यही सिलसिला पूर्ति उद्योग समूह में चला. एक बंद पड़ा शक्कर कारखाना लिया. किसानों को उसमें शेयर होल्डर बनाया. उनसे गन्ने की खेती कराई, गन्ना लगाने के धन उपलब्ध कराया, पूरा गन्ना खरीदा. आज हजारों किसानों की माली हालत इस कारण सुधर गई है. शक्कर कारखाने के वेस्ट से अल्कोहल बनाना और गन्ने की रद्दी से गत्ते बनाना. यानी हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा-चोखा.